झीरम घाटी हत्याकांड में बड़ा फैसला, 13 साल बाद 10 दोषियों को मृत्युदंड
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में करीब 13 साल बाद अदालत ने सजा का ऐलान कर दिया है। जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने बुधवार को सजा के बिंदु पर फैसला सुनाया।
इससे पहले 5 सितंबर 2026 को अदालत ने मुकदमे का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था और सजा सुनाने के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की गई थी।
इन 10 दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा
मामले में दोषी ठहराए गए आरोपियों में प्रमिला मोडियाम, सुमित्रा पुनेम, मुक्का मांडवी, मड़कामी देवा, कोसा कवासी, आयत मरकाम, बंजामी सेना, चैतू लेकाम, जोगा मड़कामी और महादेव नागा शामिल हैं।
मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी। ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई थी, जिसके बाद शेष 10 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही। सभी दोषी वर्तमान में केंद्रीय जेल में बंद बताए गए हैं।
NIA की ओर से मामले में करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट पेश की गई थी और मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी हमला
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी से गुजर रहा था। इसी दौरान माओवादियों ने काफिले पर घात लगाकर हमला किया था।
हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और अन्य लोगों समेत 32 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। मृतकों में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत कई प्रमुख नाम शामिल थे। NIA के आधिकारिक केस रिकॉर्ड में हमले में 27 लोगों की मौत और 38 लोगों के घायल होने का विवरण भी दर्ज है, जबकि स्थानीय/मीडिया रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 32 बताई गई है।
फैसले के खिलाफ अपील का रास्ता खुला
मृत्युदंड का फैसला आने के बाद भी मामले की न्यायिक प्रक्रिया समाप्त नहीं होती। दोषियों को कानून के तहत ऊपरी अदालत में इस फैसले को चुनौती देने का अधिकार है। ऐसे में आगे की कानूनी प्रक्रिया संबंधित अपील और उसके बाद होने वाली न्यायिक सुनवाई पर निर्भर करेगी।
करीब 13 साल पुराने इस मामले में 5 सितंबर को दोषसिद्धि और अब 16 सितंबर को सजा सुनाए जाने के बाद झीरम घाटी प्रकरण की न्यायिक प्रक्रिया एक अहम चरण में पहुंच गई है।