पूर्व विधायक संतोष बाफना ने शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती में लगाया भ्रष्टाचार का आरोप

राज्यपाल और उच्च शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र की चयन सूची में रोक लगाने और जांच की मांग

पूर्व विधायक संतोष बाफना ने शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती में लगाया भ्रष्टाचार का आरोप

जगदलपुर। शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय (बस्तर विश्वविद्यालय) में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर की जा रही शैक्षणिक भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर बड़े विवादों के घेरे में है। जगदलपुर के पूर्व विधायक एवं भाजपा नेता संतोष बाफना ने विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज श्रीवास्तव पर सीधे तौर पर गंभीर भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों से भारी आर्थिक लेन-देन करने के संगीन आरोप लगाए हैं। इस संबंध में बाफना ने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा को एक औपचारिक पत्र लिखकर पूरी भर्ती प्रक्रिया की तत्काल उच्च स्तरीय जांच कराने और वर्तमान चयन सूची पर रोक लगाने की मांग की है।

बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों से 20-20 लाख रुपये के लेन-देन की शिकायतें...बाफना

पूर्व विधायक संतोष बाफना ने पत्र का हवाला देते हुए बताया है कि, कुलपति मनोज श्रीवास्तव द्वारा उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों के उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से पूरी भर्ती प्रक्रिया में गोपनीयता बरती जा रही है। स्थानीय स्तर पर और पीड़ित अभ्यर्थियों से पुख्ता शिकायतें मिली हैं कि, इस चयन के पीछे बहुत बड़ा आर्थिक लेन-देन हुआ है। बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों से कथित तौर पर 20-20 लाख रुपये लेकर उनका चयन सुनिश्चित किया गया है। यह बस्तर और छत्तीसगढ़ के प्रतिभावान व योग्य स्थानीय युवाओं के अधिकारों पर सीधा डाका है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया है कि, कुलपति मनोज श्रीवास्तव के कार्यकाल में हुई पिछली भर्तियों में भी इसी तरह दूसरे राज्यों के लोगों को अनुचित लाभ देने और लेन-देन के विवाद सामने आ चुके हैं।

गड़बड़ी छिपाने के लिए बिना नाम की सूची और एप्लिकेशन आईडी का खेल...बाफना

बाफना ने कहा है कि, स्थापित शैक्षणिक और प्रशासनिक परंपराओं को ताक पर रखकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने पात्र-अपात्र अभ्यर्थियों की सूची में से आवेदकों के नाम ही गायब कर दिए हैं और केवल एप्लिकेशन आईडी जारी की है। बिना नाम और बिना शैक्षणिक स्कोरिंग (अंकों) के सूची जारी होने से दावा-आपत्ति की पूरी प्रक्रिया महज एक औपचारिकता बनकर रह गई है, क्योंकि किसी भी आवेदक को यह जानने का हक ही नहीं मिल रहा है कि, उसे किस आधार पर पात्र या अपात्र किया गया है। इसके अलावा, योग्य उम्मीदवारों को बिना कारण बताए नॉट फाउंड सूटेबल घोषित करने, रोस्टर में खुलेआम हेरफेर करने और दिव्यांग अभ्यर्थियों की उपेक्षा करने जैसी गंभीर अनियमितताएं भी की गई हैं।

राज्यपाल से त्वरित एवं कड़ी कार्यवाही की मांग

पूर्व विधायक ने राज्यपाल व शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति रमेन डेका से इस संवेदनशील मामले में त्वरित हस्तक्षेप की मांग करते हुए निम्नलिखित प्रमुख बिंदु रखे हैं

बस्तर विश्वविद्यालय की इस पूरी विवादित भर्ती प्रक्रिया की तत्काल एक स्वतंत्र, समयबद्ध और उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए (विशेष रूप से कथित आर्थिक लेन-देन के आरोपों की जांच हो)।

वर्तमान अपारदर्शी प्रक्रिया पर रोक लगाकर सभी आवेदकों के नाम, उनके शैक्षणिक स्कोर और मूल्यांकन के स्पष्ट आधार के साथ3 वास्तविक व सही संशोधित सूची पुनः सार्वजनिक की जाए।

बस्तर जैसे संवेदनशील और पिछड़े क्षेत्र के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले दोषियों पर सख्त वैधानिक और दंडात्मक कार्यवाही की जाए।

इस मामले पर पूर्व विधायक संतोष बाफना का साफ तौर पर कहना है कि, लाखों रुपये के इस कथित भ्रष्टाचार और अपारदर्शिता से बस्तर के युवाओं का मनोबल टूट रहा है और यह न केवल बस्तर के योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है, बल्कि उच्च शिक्षा के स्तर और बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्र के विकास पर भी बुरा असर डालता है।