भर्ती परीक्षाओं में धोखाधड़ी रोकने वाला विधेयक सर्वसम्मति से पारित
छत्तीसगढ़ विधानसभा में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और नकल पर रोक लगाने के लिए अहम कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने “छत्तीसगढ़ लोक भर्ती एवं व्यवसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम विधेयक” सदन में पेश किया, जिसे पक्ष-विपक्ष ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया।
नकल गिरोह पर सख्त शिकंजा
विधेयक पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कानून सरकारी भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार और नकल माफिया पर लगाम लगाने के लिए लाया गया है। यह कानून छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग, छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल सहित सभी निगम और मंडलों की परीक्षाओं पर लागू होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब नकल या धांधली होने पर सिर्फ अभ्यर्थी ही नहीं, बल्कि सेवा प्रदाता एजेंसियां भी जिम्मेदार मानी जाएंगी।
3 से 10 साल की सजा, 1 करोड़ तक जुर्माना
मुख्यमंत्री ने बताया कि नए कानून के तहत दोषी पाए जाने पर 3 से 10 साल तक की सजा और अधिकतम 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। नकल करने वाले अभ्यर्थियों को 3 साल तक परीक्षाओं से प्रतिबंधित किया जाएगा, वहीं नकल गिरोह की संपत्ति जब्त करने का भी प्रावधान है।
जांच का जिम्मा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को दिया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर अन्य एजेंसियों से भी जांच कराई जा सकेगी।
“युवाओं से किया वादा निभा रहे हैं”
सीएम साय ने कहा कि सरकार युवाओं से किए वादों को पूरा कर रही है और इस कानून से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि अब किसी भी स्तर पर गड़बड़ी करने वाले बच नहीं पाएंगे।
विपक्ष का भी मिला समर्थन
विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने दोषियों को कड़ी सजा देने का समर्थन किया। वहीं भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने कहा कि इस कानून के बाद कोई भी धांधली करने की हिम्मत नहीं करेगा।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इससे युवाओं का भविष्य सुरक्षित होगा।
सर्वसम्मति से पारित
सदन में विस्तृत चर्चा के बाद विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। खास बात यह रही कि विपक्ष के किसी भी विधायक ने इसका विरोध नहीं किया।
सरकार का मानना है कि इस कानून से भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और युवाओं का भरोसा व्यवस्था पर और मजबूत होगा।