मां दुर्गा की आराधना के साथ शारदीय नवरात्र पर्व का शुभारंभ
घटस्थापना के साथ शुरू हुई नौ दिनों की साधना
मां दुर्गा की आराधना और शक्ति उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र आज से शुरू हो रहा है। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना के साथ घरों और मंदिरों में घटस्थापना की जाएगी। अगले नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा होगी। मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और दुर्गा पूजा पंडालों में धार्मिक आयोजन किए जाएंगे। इस बार तिथि वृद्धि के कारण नवरात्र का पर्व 10 दिनों तक चलेगा। चारों ओर भक्तिमय माहौल के बीच श्रद्धालु मां दुर्गा से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करेंगे। जय माता दी!
इस बार 10 दिनों तक चलेगा शारदीय नवरात्र पर्व
शारदीय नवरात्र पर्व इस बार तिथियों में वृद्धि के कारण 10 दिनों तक चलेगा। पंचांग के अनुसार, सप्तमी तिथि दो दिनों तक रहने के कारण नवरात्र की अवधि एक दिन बढ़ गई है। हालांकि, इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा परंपरागत विधान के अनुसार ही की जाएगी। पंचांग के अनुसार, सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब कोई तिथि लगातार दो दिनों के सूर्योदय के समय विद्यमान रहती है, तो उसे तिथि वृद्धि कहा जाता है। इसी कारण इस बार नवरात्र पर्व की अवधि बढ़ गई है। 11 अक्टूबर से शुरू हुआ शारदीय नवरात्र पर्व 20 अक्टूबर को नवमी तिथि के बाद विजयादशमी और दशहरा के साथ संपन्न होगा। नवरात्र के दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करेंगे। मंदिरों और पूजा पंडालों में धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और अन्य आयोजन किए जाएंगे। नवरात्र का पर्व शक्ति, भक्ति और आस्था का प्रतीक है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना के माध्यम से श्रद्धालु सुख, समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करते हैं। तिथि वृद्धि के कारण इस बार पर्व की अवधि में बदलाव होने से श्रद्धालुओं के लिए पंचांग के अनुसार पूजा और अनुष्ठान करना महत्वपूर्ण रहेगा।
नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना, हर स्वरूप का अपना विशेष महत्व
1. मां शैलपुत्री: नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री और वृषभ पर सवार मां शैलपुत्री स्थिरता, धैर्य और मन की दृढ़ता का प्रतीक हैं।
2. मां ब्रह्मचारिणी: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना होती है। वे कठोर तपस्या, ज्ञान, वैराग्य और संयम की प्रतीक हैं। उनकी पूजा से साधक को धैर्य और आत्मबल की प्रेरणा मिलती है।
3. मां चंद्रघंटा: तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने वाली मां का स्वरूप साहस और शक्ति का प्रतीक है। मान्यता है कि उनकी आराधना से भय दूर होता है और भक्तों को आत्मविश्वास मिलता है।
4. मां कूष्मांडा: चौथे दिन मां कूष्मांडा की उपासना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करने वाली मां कूष्मांडा आयु, यश, आरोग्य और सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं।
5. मां स्कंदमाता: पांचवें दिन भगवान कार्तिकेय की माता स्कंदमाता की पूजा होती है। वे वात्सल्य, मातृत्व और संतान सुख की प्रतीक मानी जाती हैं। भक्त उनसे परिवार की खुशहाली और संतान के कल्याण की कामना करते हैं।
6. मां कात्यायनी: छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना की जाती है। महर्षि कात्यायन की पुत्री के रूप में प्रकट हुईं मां कात्यायनी साहस और पराक्रम की प्रतीक हैं। मान्यता है कि उनकी कृपा से दांपत्य जीवन में सुख और बाधाओं पर विजय प्राप्त होती है।
7. मां कालरात्रि: सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। उनका स्वरूप नकारात्मक शक्तियों और अंधकार के विनाश का प्रतीक है। भक्त उनसे निर्भयता, सुरक्षा और संकटों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।
8. मां महागौरी: आठवें दिन मां महागौरी की आराधना होती है। श्वेत वस्त्र धारण करने वाली मां महागौरी पवित्रता, शांति और निर्मलता का प्रतीक हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी कृपा से पापों का क्षय और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
9. मां सिद्धिदात्री: नवरात्र के नौवें और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। उन्हें सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। उनकी आराधना से ज्ञान, आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होने की मान्यता है।
आस्था और शक्ति का पर्व है नवरात्र
शारदीय नवरात्र के नौ दिन मां दुर्गा की भक्ति, साधना और शक्ति उपासना को समर्पित हैं। श्रद्धालु इन दिनों व्रत, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से मां का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। मां दुर्गा के नौ स्वरूप नारी शक्ति, साहस, करुणा, तपस्या और धर्म की विजय का संदेश देते हैं।