आईआईटी का कमाल: 50 किमी आप्टिकल फाइबर पर भेजा पारंपरिक और क्वांटम डेटा
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के वैज्ञानिकों ने 50 किलोमीटर लंबी ऑप्टिकल फाइबर केबल पर पारंपरिक संकेतों के साथ संवेदनशील क्वांटम डेटा सफलतापूर्वक भेजा है। प्रोफेसर भास्कर कांसेरी के नेतृत्व में हुए इस सफल परीक्षण से मौजूदा टेलीकॉम ढांचे पर सुरक्षित संचार व्यवस्था बनाना आसान और किफायती हो जाएगा। यह उपलब्धि राष्ट्रीय क्वांटम मिशन द्वारा समर्थित है और इससे बैंकिंग व रक्षा क्षेत्र की डेटा सुरक्षा को बड़ा लाभ मिलेगा। दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के शोधकर्ताओं ने 50 किलोमीटर लंबे ऑप्टिकल फाइबर लिंक पर पारंपरिक डेटा के साथ ‘क्वांटम-एंटैंगल्ड फोटॉन’ के संचरण का सफल प्रदर्शन किया है। संस्थान ने इसे क्वांटम संचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। इस शोध का नेतृत्व कर रहे आईआईटी दिल्ली के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर भास्कर कांसेरी ने बताया कि क्वांटम और पारंपरिक डेटा संकेतों (सिग्नल) के लिए एक ही फाइबर नेटवर्क का उपयोग करने से संचार व्यवस्था काफी सस्ती होगी और इसे बड़े पैमाने पर लागू करना भी आसान हो जाएगा। दक्षिण-एशियाईऔर प्रवासी
प्रोफेसर कांसेरी ने कहा कि यह शोध भविष्य के क्वांटम संचार नेटवर्क की एक बड़ी व्यावहारिक अड़चन को दूर करता है। अब तक सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि जिस फाइबर ऑप्टिक केबल से ‘हाई-स्पीड’ पारंपरिक टेलीकॉम डेटा भेजा जाता है, उसी के जरिए बेहद संवेदनशील क्वांटम संकेतों को बिना किसी रुकावट के कैसे ट्रांसमिट किया जाए। ‘क्वांटम एंटैंगलमेंट’ कई आधुनिक क्वांटम प्रौद्योगिकियों का आधार है।
यह संवेदनशील जानकारी के सुरक्षित आदान-प्रदान के नए तरीके उपलब्ध कराता है। कांसेरी ने कहा, ‘‘क्वांटम संकेतों को मौजूदा दूरसंचार नेटवर्क के साथ जोड़ना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है। पारंपरिक ऑप्टिकल संकेत आमतौर पर काफी मजबूत होते हैं और ऐसा शोर पैदा करते हैं, जो संवेदनशील क्वांटम स्थिति को बाधित कर सकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारे परीक्षण ने साबित किया है कि नियंत्रित परिस्थितियों में क्वांटम और पारंपरिक डेटा एक ही ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क पर एक साथ काम कर सकते हैं।
यह मौजूदा नेटवर्क के साथ नयी प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक तालमेल की दिशा में एक बड़ा कदम है।’’ आईआईटी दिल्ली के ‘इंसेंटिव ऑफ एक्सीलेंस’ (आईओई) अनुदान और राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (एनक्यूएम) द्वारा वित्त पोषित यह शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘ऑप्टिक्स कम्युनिकेशन’ में प्रकाशित हुआ है। इस उपलब्धि के दीर्घकालिक उपयोग बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। इससे बैंक, सरकारी एजेंसियां, स्वास्थ्य सेवाएं और रक्षा से जुड़े संस्थान अपने संवेदनशील डेटा और संचार को अधिक सुरक्षित बना सकेंगे।