मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में बिना अनुमति प्रदर्शन पर सीजेपी आयोजकों समेत 500 पर दर्ज की FIR

मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में बिना अनुमति प्रदर्शन पर सीजेपी आयोजकों समेत 500 पर दर्ज की FIR

पुलिस ने बिना अनुमति शिवाजी पार्क में प्रदर्शन करने पर कॉकरोच जनता पार्टी के आयोजकों और 400-500 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ BNS धाराओं में FIR दर्ज की है। यह विरोध प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। उधर दिल्ली पुलिस ने भी निषेधाज्ञा उल्लंघन के मामलों में तीन FIR दर्ज की हैं।
मुंबई पुलिस ने शुक्रवार को शिवाजी पार्क में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के विरोध प्रदर्शन को लेकर आयोजकों और 400-500 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि CJP नेताओं ने बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा किया और मुंबई पुलिस से इजाज़त न मिलने के बावजूद विरोध प्रदर्शन किया। मुंबई पुलिस ने पहले शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को प्रस्तावित सभा के लिए इजाज़त देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के 4 जनवरी, 2013 के फ़ैसले और महाराष्ट्र सरकार के 20 जनवरी, 2016 के आदेश के तहत लगी पाबंदियों का हवाला दिया था।
पुलिस ने आयोजकों को विरोध प्रदर्शन के लिए कोई दूसरी जगह चुनने की सलाह भी दी थी। इजाज़त न मिलने के बावजूद प्रदर्शन किया गया और इसका मकसद ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग करना था। पुलिस ने आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 189(2) और 223, और महाराष्ट्र पुलिस एक्ट की धारा 37(1), 37(3) और 135 के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने इस सभा की इजाज़त देने से इनकार करते हुए इलाके में ट्रैफ़िक, शोर और लोगों की आवाजाही से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया था। यह FIR मुंबई में हुए उस विरोध-प्रदर्शन के बाद दर्ज की गई है, जो चुनाव आयोग और उसके कामकाज के ख़िलाफ़ चल रहे एक बड़े अभियान का हिस्सा था। 
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने राजधानी में 2 अक्टूबर को हुए एक अलग विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में तीन FIR दर्ज कीं। इनमें से दो मामले पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में और एक मामला कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया। दिल्ली के मामले उन आरोपों से जुड़े हैं जिनमें कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत नई दिल्ली ज़िले में लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया। ये FIR, BNS की धारा 223 के तहत दर्ज की गईं, जिसमें किसी सरकारी अधिकारी द्वारा विधिवत जारी आदेश की कथित अवहेलना का आरोप है