जून से महंगी हो सकती है बिजली, 6300 करोड़ घाटे का हवाला देकर नए टैरिफ की तैयारी

जून से महंगी हो सकती है बिजली, 6300 करोड़ घाटे का हवाला देकर नए टैरिफ की तैयारी

छत्तीसगढ़ के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को जून माह से महंगी बिजली का सामना करना पड़ सकता है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली टैरिफ तय करने की प्रक्रिया में जुटा है। आयोग किसी भी समय नई दरों की घोषणा कर सकता है, जो जून या जुलाई से लागू हो सकती हैं।

टैरिफ निर्धारण में देरी की बड़ी वजह राज्य की पॉवर कंपनियों द्वारा आगामी चार वर्षों का विस्तृत वित्तीय लेखा-जोखा आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाना है। इसके साथ ही 6300 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे की भरपाई संबंधी याचिका पर भी गहन मंथन चल रहा है, जिसके कारण अंतिम निर्णय में समय लग रहा है।

6300 करोड़ रुपये के घाटे का दावा
पॉवर कंपनी ने आयोग को दी गई याचिका में बताया है कि मौजूदा दरों पर वर्ष 2026-27 में लगभग 26,216 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने की संभावना है, जबकि अनुमानित खर्च 25,460 करोड़ रुपये रहेगा। इस हिसाब से कंपनी को 756 करोड़ रुपये का लाभ दिखाई दे रहा है।

हालांकि, कंपनी का कहना है कि पिछले वर्षों के राजस्व अंतर और बकाया घाटे को जोड़ने के बाद भी करीब 6300 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की आवश्यकता होगी। इसी आधार पर नए टैरिफ में वृद्धि की मांग की गई है।

हर साल बढ़ेगा बिजली उत्पादन और खरीद का खर्च

याचिका के अनुसार वर्ष 2026-27 में बिजली खरीद पर सबसे अधिक 21,150.81 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा 3,250.34 करोड़ रुपये संचारण एवं संधारण, 429.50 करोड़ रुपये ब्याज और 1,116.15 करोड़ रुपये अन्य मदों में खर्च होंगे।

आगामी वर्षों में यह खर्च लगातार बढ़ने का अनुमान है। वर्ष 2027-28 में कुल खर्च 27,306 करोड़ रुपये, 2028-29 में 30,307 करोड़ रुपये और 2029-30 में बिजली खरीद पर ही 27,179 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान जताया गया है।

आयोग के फैसले पर टिकी उपभोक्ताओं की नजर
अब सभी की निगाहें विद्युत नियामक आयोग के फैसले पर टिकी हैं। यदि कंपनी की मांगों को मंजूरी मिलती है, तो घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को बिजली बिल में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि किसी भी दर वृद्धि से पहले जनता के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।